What is Immunity? | Innate & Adaptive Immunity | In Hindi

इंट्रो

तो आज के इस आर्टिकल में हम बात करेंगे कि इम्यूनिटी क्या होती है। और उसके कितने प्रकार होते हैं। और उन प्रकार की जानकारी मैं आपको दूंगा। मैंने आपको इस आर्टिकल में वह हर बात बताई है। जो मुझे लगता है कि आपके लिए जाननी जरूरी है। तो चलिए इस आर्टिकल को शुरू करते हैं।

इम्युनिटी क्या होती है?

इम्यूनिटी (Immunity) हर एक मानवीय शरीर के लिए बहुत ज्यादा जरूरी है। इसके बिना कोई भी व्यक्ति जीवित नहीं रह सकता। अगर आसान शब्दों में इसे समझने की कोशिश करें। तो इम्यूनिटी आपके शरीर में एक ऐसी चीज है। जो आपको हर प्रकार के रोगों से बचा के रखती है। और आपको किसी भी बीमारी की चपेट में नहीं आने देती। यह आपके शरीर को किसी भी प्रकार के फॉरेन पदार्थ (Foreign particle) और बैक्टीरिया (Bacteria) से बचा के रखती है।

इम्युनिटी के दो प्रकार हैं।
1. Innate Immunity
2. Adaptive Immunity

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What is Innate immunity ?

Innate immunity and their types

Natural & Inherent

यह इम्युनिटी हर व्यक्ति के शरीर में जन्म से होती है। इसके कई और भी प्रकार है । पर हम सिर्फ 3 प्रकार की बात करेंगे जो जरूरी हैं।
इसके 3 प्रकार है।

1. Physical Barrier
2. Physiological Barrier
3. Cytokine barrier

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Physical Barrier

Physical Barrier उसे कहते हैं। जोबैक्टीरिया को बाहर ही रोक लेता है। इसमें 2 प्रकार के Physical Barrier हैं।

1. त्वचा (Skin)

आपकी त्वचा पर हजारों बैक्टीरिया होते हैं। लेकिन आपकी त्वचा उन बैक्टीरिया को आपके शरीर के अंदर जाने से रोकती है। इस प्रकार यह एक एक्सटर्नल बैरियर (External Barrier) का काम निभाती है। और इस प्रकार आपकी त्वचा (Skin) बैक्टीरिया और इनर डिफेंस कॉम्पोनेन्ट मे एक बैरियर का काम निभाती है।

2. मुकोसा (Mucosa)

म्यूकस लुब्रिकेंट करने में काम आता है। ताकि जो आपका खाना है। वह आसानी से आपके गले के अंदर से जा पाए। और उसके बाद मान लीजिए कि अगर आपने खाना खाया और उसमें कुछ बैक्टीरियस भी है। तो वह उन बैक्टीरिया को वहां पर ही पकड़ (Trap) कर लेता है। और उन बैक्टीरिया को अंदर नहीं जाने देता।

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Physiological Barrier

तो फिजियोलॉजिकल बैरियर का मतलब होता है। जो हमारे डाइजेस्टिव सिस्टम (Digestive system), रेस्पिरेटरी सिस्टम (Respiratory System) और आदि द्वारा सिक्रेट होता है। और यह आपके शरीर को इम्यून करते हैं।

1. थूक (Saliva)

मान लीजिए कि अगर आपने कोई काम किया और आपने उसके बाद हाथ नहीं धोये। और आप सीधा खाना खाने के लिए चले गए। तो जब आप खाना खाएंगे। तोह आपके हाथ पर बहुत सारे बैक्टीरिया लगे हुए होंगे। जो आपके खाने के साथ आपके मुंह के अंदर चले जायेंगे। तो आपके थूक के अंदर एक enzyme होता है। जिसे कहते हैं lysozyme। और यह ज्यादातर बैक्टीरिया को आपके मुंह में ही मार देता है। जिससे यह आपके इम्यून सिस्टम में मदद करता है।

2. पेट में एसिड (Acid in stomach)

आपके पेट मे HCL (Hydrochloric Acid) होता है। अभी आप यह सोच रहे होंगे कि अगर पेट मे एसिड होता है। तोह पेट जल क्यों नही जाता। तोह यह इस लिए कियूंकि आपका पेट Mucosa की लेयर से Cover होता है। इसके कारण पेट और एसिड मैं कोई कांटेक्ट नही बनाता। और इस एसिड की PH value 1.8 होती है। तो जो आपके कीटाणु आपके खाने के साथ आपके पेट के अंदर आते हैं। तो उन बैक्टीरिया को यह एसिड मार देता है। जिससे यह एक Physiological barrier का काम करता है।

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3. आंसू (Tears)

आपकी आंखों से जो आंसू आते हैं। वह भी एक Physiological barrier का काम करते हैं। जब आपकी आंखों से आंसू आते हैं। उसमें भी एंटीबैक्टीरियल सब्सटेंस (Antibacterial Substance) होतें हैं। जो आपको बहुत सारे इंफेक्शन (Infection) और कंजेक्टिवाइ (Conjunctivitis) जैसे रोगों से बचाता है।

4. सेरुमन (Cerumen)

Cerumen कानों में जो Ear wax होती है उसे कहते हैं। यह भी एक फिजियोलॉजिकल बैरियर का काम करती है। और यह जो बैक्टीरिया होते हैं। उन्हें अपने में Trap करके वहां पर ही मारने की कोशिश करती है। जिससे आपके कानों में इंफेक्शन नहीं होती।

5. पित्त (Bile)

यह खाने को सड़ने से बचाता है। यह गाल ब्लैडर द्वारा सैक्रीट होता है। यह लीवर द्वारा बनाया जाता है।

6. शरीर का तापमान (Body Temperature)

आपकी बॉडी का Temperature भी फिजियोलॉजिकल बैरियर का काम करता है। तो जो आपकी बॉडी का नार्मल तापमान होता है। वह होता है 37℃। और अगर मान लीजिए कि आप की बॉडी में कोई पैथोजन (Pathogen) एंटर कर गया है। तो आपकी बॉडी का Temperature एकदम से बढ़ जाएगा। जिससे वह पैथोजन (Pathogen) या बैक्टीरिया आपकी बॉडी में जीवित नहीं रह पाएगा।

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Cytokine barrier

इसमें जो इनफेक्टेड सेल होता है। वह एक प्रोटीन रिलीज करता है। जिसका नाम इंटरफेरॉन (Interferon) होता है। जो दूसरे अन्य सेल्स को उस इंफेक्शन से बचाता है।

What is Acquired immunity?

दूसरी इम्युनिटी का नाम एक्वायर्ड इम्यूनिटी (Acquired Immunity) है। एक्वायर्ड इम्यूनिटी (Acquired Immunity) उसे कहते हैं। जो आपकी बॉडी मैं जन्म से नहीं होती है। लेकिन हम यह कह सकते हैं कि। जितनी जिंदगी आप जिएंगे उसमें आपकी बॉडी ने जैसे-जैसे बीमारियों से लड़ना सीखा है। उसे हम एक्वायर्ड इम्यूनिटी कहेंगे।
एक्वायर्ड इम्यूनिटी के दो प्रकार होते हैं।
1. Active
2. Passive

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Active

मैं आपको Active immunity के बारे में एक उदाहरण से समझाता हूं। मान लीजिए एक व्यक्ति है। जिसे चिकन पॉक्स (Chicken Pox) या स्मॉल पॉक्स (Small Pox) हो गया है। तो उसकी बॉडी क्या करेगी उस टाइम पर वह एंटीबॉडीज बनानी शुरू कर देगी चिकन पॉक्स ए स्मॉल पॉक्स के लिए। और उसके बाद वह व्यक्ति ठीक हो जाएगा। लेकिन इसका एक फायदा यह होता है। कि यह लॉन्ग लास्टिंग (Long Lasting) होती है। मतलब इसके पास खुद की मेमोरी (Memory) होती है।

मान लीजिए अगर उस व्यक्ति को फिर से भविष्य में चिकन पॉक्स या स्मॉल पॉक्स होता है। तो उसकी बॉडी उस बीमारी को उस पर हावी होने से पहले ही। उस बीमारी को खत्म कर देगी। तो अभी आप सोच रहे होंगे कि अगर ऐसा होता है। तो क्यों एक आदमी को मलेरिया बार-बार होता है। तो मैं आपको बता दूं कि जो मलेरिया है। इसका स्ट्रक्चर अलग है। इस लिए एक व्यक्ति को मलेरिया कई बार हो सकता है। लेकिन इसका एक नुकसान यह भी है अगर कोई आदमी है। जिसकी इम्यूनिटी इतनी अच्छी नहीं है। तो उसमें यह चीज काम नहीं करेगी। क्योंकि उसकी खुद की इम्युनिटी पूरी नहीं हो रही है। तो वह अलग से एंटीबॉडीज कैसे बना सकती है।

Passive

पैसिव (Passive) का मतलब यह होता है। कि जो आपको आपके बॉडी नहीं बना कर दे सकती। आप इसे आर्टिफिशियल लेते हैं। मान लीजिए कि अगर आपको किसी सांप ने काटा है। तो उस टाइम के लिए आप उसके जहर को खत्म करने के लिए। आप से एंटीबॉडीज अपनी बॉडी में इंजेक्ट करवाएंगे। और इसका एक नुकसान यह है। कि यह लॉन्ग लास्टिंग (Long Lasting) नहीं होता है। इसकी जो मेमोरी होती है वह बहुत ही थोड़े समय के लिए होती है।

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इसी के साथ यह आर्टिकल खत्म हुआ। तो अगर आपको कोई सवाल है। तो आप मुझे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके पूछ सकते हैं।और आप मुझे कांटेक्ट फॉर्म मे भी पुच सकते हो। मैं उसका उत्तर जरूर दूंगा। और अगर आपको यह आर्टिकल अच्छा लगा है। तो आप नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करके अपने दोस्तों के साथ इस आर्टिकल को शेयर भी कर सकते हैं। तो हम मिलेंगे आपसे एक और नए आर्टिकल में। तब तक के लिए खुश रहें और स्वस्थ रहें।

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